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Haryana Rajya Sabha Election 2026: हरियाणा की राज्यसभा सीटों पर सियासी हलचल तेज, 16 मार्च को होगा मुकाबला, क्या बदलेगा गणित?

भारत निर्वाचन आयोग ने हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों समेत 10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव की घोषणा की है। राज्य में 16 मार्च को मतदान होगा और 5 मार्च तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे। भाजपा सांसद किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। मौजूदा विधानसभा गणित के अनुसार एक-एक सीट भाजपा और कांग्रेस के खाते में जा सकती है।

Haryana Rajya Sabha Election 2026 : हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। भारत निर्वाचन आयोग ने अधिसूचना जारी करते हुए 16 मार्च को मतदान और 5 मार्च तक नामांकन दाखिल करने की तिथि निर्धारित की है। मतगणना भी मतदान के दिन ही शाम को की जाएगी।

इन दोनों सीटों पर फिलहाल भाजपा का कब्जा है। राज्यसभा सांसद किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। रामचंद्र जांगड़ा मार्च 2020 में निर्विरोध राज्यसभा पहुंचे थे और उनका कार्यकाल 10 अप्रैल 2020 से 9 अप्रैल 2026 तक है। वहीं किरण चौधरी अगस्त 2024 में उपचुनाव के जरिए राज्यसभा सदस्य बनी थीं। यह सीट दीपेंद्र हुड्डा के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी, जिन्होंने रोहतक से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद राज्यसभा की सदस्यता छोड़ी थी।

विधानसभा का गणित और जीत का कोटा

हरियाणा विधानसभा में कुल 90 वैध मत हैं। इनमें भाजपा के 48, कांग्रेस के 37, तीन निर्दलीय और दो इनेलो विधायक शामिल हैं। राज्यसभा की दो सीटों के लिए जीत का कोटा निकालने का फार्मूला है: कुल वैध मत ÷ (रिक्त सीटें + 1) + 1। इस आधार पर (90 ÷ 3) + 1 = 31। यानी किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 31 वोट की आवश्यकता होगी।

यदि भाजपा दो उम्मीदवार उतारती है और कांग्रेस एक प्रत्याशी मैदान में लाती है, तो भाजपा पहले चरण में अपने एक उम्मीदवार को 31 वोट देकर जिता सकती है और उसके पास 17 वोट शेष रहेंगे। कांग्रेस अपने 37 विधायकों के दम पर 31 वोट देकर एक सीट जीत सकती है, जिसके बाद उसके पास 6 वोट बचेंगे। इस स्थिति में एक सीट भाजपा और एक सीट कांग्रेस को मिलती दिखाई देती है।

दूसरी सीट पर क्या होगा खेल?

पहले चरण के बाद भाजपा के 17, कांग्रेस के 6, निर्दलीय 3 और इनेलो के 2 वोट मिलाकर कुल 28 वोट बनते हैं, जो 31 के कोटे से कम हैं। यदि निर्दलीय और इनेलो भाजपा का समर्थन करते हैं, तब भी आंकड़ा 22 तक ही पहुंचेगा। ऐसे में दूसरी सीट जीतने के लिए भाजपा को कम से कम 9 अतिरिक्त क्रॉस वोट की आवश्यकता होगी। यही कारण है कि दूसरी सीट पर समीकरण बेहद पेचीदा माने जा रहे हैं।

निर्विरोध जीत की संभावना

संवैधानिक मामलों के जानकार एडवोकेट हेमंत कुमार का कहना है कि यदि भाजपा और कांग्रेस एक-एक उम्मीदवार ही मैदान में उतारती हैं, तो मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी। नाम वापसी की अंतिम तिथि पर दोनों प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया जा सकता है। लेकिन यदि भाजपा अतिरिक्त उम्मीदवार उतारती है तो चुनाव अनिवार्य हो जाएगा और क्रॉस वोटिंग निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

कांग्रेस और भाजपा में संभावित चेहरे

कांग्रेस की ओर से बाहरी चेहरे पर दांव लगाए जाने की चर्चा है। बीके हरि प्रसाद, जयराम रमेश और पवन खेड़ा के नाम सामने आ रहे हैं। प्रदेश स्तर पर उदयभान और राव दान सिंह के नाम भी विचाराधीन बताए जा रहे हैं।

भाजपा में भी कई दावेदार सक्रिय हैं। कुलदीप बिश्नोई, कैप्टन अभिमन्यु, सतीश पूनिया, कमल गुप्ता, सुनीता दुग्गल और सुदेश कटारिया जैसे नामों की चर्चा है। साथ ही यह माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की राय उम्मीदवार चयन में अहम भूमिका निभा सकती है। किरण चौधरी के दोबारा नाम पर भी पार्टी में मंथन जारी है।

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